Inferno Club -:
Inferno क्लब शहर का सबसे हॉट और सबसे खतरनाक ठिकाना था। इसका नाम सिर्फ एक आकर्षक शब्द नहीं था; यह एक चेतावनी थी, एक वादा। जैसे ही आप इसके दरवाजे से अंदर कदम रखते, बाहर की दुनिया जैसे धुंध में गायब हो जाती।
दीवारों पर टिमटिमातीं नियॉन लाइट्स—लाल और नीले रंग की चमक—ज़ोरदार बास और डीजे के ट्रैक से गूंजती हवा, सब कुछ ऐसा जैसे आप किसी और ब्रह्मांड में आ गए हों। हवा में शराब, महंगे परफ्यूम, और कुछ अनकहा, प्राचीन उत्तेजना का मिश्रण था—ऐसा कुछ जो आपकी त्वचा पर चिपक जाता और आपकी नब्ज को तेज कर देता।
डांस फ्लोर पर लोग समंदर की लहरों की तरह लहरा रहे थे। लड़के-लड़कियां बिना किसी हिचक के एक-दूसरे से चिपककर नाच रहे थे, उनकी हंसी तेज और क्षणभंगुर थी, उनकी हरकतें शराब और वासना से भरी थीं।
बासलाइन दीवारों से होकर गुजर रही थी, जैसे क्लब का अपना दिल धड़क रहा हो, जो हर थिरकन, हर स्पर्श के साथ ताल मिला रहा था। कोनों में जोड़े धीमी, भारी आवाज में रहस्य साझा कर रहे थे, उनके शब्द संगीत में डूब रहे थे, लेकिन उनकी नीयत उनके हाथों की हरकतों में साफ झलक रही थी।
ऊपर, एक निजी कमरे में, नीचे के शोरगुल से दूर, तीन लड़के एक कांच की मेज के आसपास बैठे थे, जिस पर खाली बोतलें और आधे भरे ग्लास बिखरे पड़े थे। कमरा मद्धम रोशनी से भरा था, एक अकेली एम्बर लैंप की रोशनी लंबी परछाइयां डाल रही थी। यहां का माहौल शांत था, लेकिन उतना ही तनावपूर्ण।
बर्फ के ग्लास से टकराने की आवाज उनकी बातचीत को विराम दे रही थी, जिसमें शरारत और कुछ गहरा, अंधेरा मकसद छिपा था।
“मैं कहता हूं, आज रात इसे वर्जिन कर के ही दम लेंगे। बरना ये कभी शादी करने से रहा।", विक्रम ने कुर्सी पर पीछे झुकते हुए कहा, उसके होठों पर एक चालाक मुस्कान थी।
उसकी आंखें व्हिस्की के नशे और बेपरवाही से चमक रही थीं। “वो अकेला है, ध्यान बंटा हुआ है। इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा।”
रेहान, जो हमेशा सतर्क रहता था, असहज होकर अपनी जगह पर हिला। उसकी उंगलियां ग्लास के किनारे पर बेचैनी से थपथपा रही थीं। “तू पागल है। अगर उसे पता चल गया, तो वो हमारी हालत खराब कर देगा। तूने उसे गुस्से में देखा है।”
“अरे, डर मत,” विक्रम ने बेपरवाह अंदाज में हाथ हिलाया। “ये बस एक मजाक है। वो हमारा दोस्त है। हंसकर भूल जाएगा… आखिरकार।”
तीसरा लड़का, अर्जुन, धीमे से हंसा, उसकी आवाज भारी और खुरदरी थी। “तू उसे कम आंक रहा है, विक। वो ऐसा नहीं है जो चुपचाप सह ले। लेकिन…” वह आगे झुका, उसकी आंखें सिकुड़ गईं। “मैं तैयार हूं। देखते हैं ये खेल कैसे खेलता है।”
उनकी हंसी अचानक थम गई जब दरवाजा चरमराया। एक लंबी, विशाल परछाई दरवाजे पर उभरी, जिसने कमरे को अपनी मौजूदगी से भर दिया। वह था—रेयांश कपूर। छह फीट दो इंच लंबा, चौड़े कंधों वाला, गहरी आंखों और रफ शर्ट से झांकती मजबूत छाती वाला। उसकी मौजूदगी ऐसी थी जैसे कोई तूफान कमरे में घुस आया हो।
“लीजिए, आ ही गए आप…” विक्रम ने हल्के मज़ाकिया लहजे में कहा, लेकिन उसकी आवाज में एक तनाव था।
रेयांश धीमे, भारी कदमों से अंदर आया और कुर्सी पर बैठ गया। उसकी आवाज गहरी और ठंडी थी, जैसे बर्फ से ढकी चट्टान। “हर बार तुम लोग मुझे ऐसी जगह क्यों बुलाते हो? ये माहौल मुझे पसंद नहीं।”
“अरे, छोड़ ना,” अर्जुन ने हंसते हुए कहा। “कुछ पी ले। बहुत दिन हो गए साथ बैठे हुए।”
वेटर एक बोतल और ग्लास रखकर चला गया। जाम छलकने लगे। बातें हल्की-फुल्की शुरू हुईं, लेकिन रेयांश का चेहरा शांत रहा। वह ज्यादा नहीं बोला, सिर्फ उनकी बातें सुनता रहा, बीच-बीच में ग्लास को होंठों तक ले जाता।
कुछ देर बाद, शराब का नशा उस पर हावी होने लगा। उसकी आंखें भारी हो गईं, और वह थोड़ा लड़खड़ाता हुआ वॉशरूम की तरफ चला गया।
तीनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और मुस्कुराए। “सब तैयार है…” विक्रम ने धीमे से कहा।
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रेयांश वॉशरूम से लौटा और सीधा उस कमरे की ओर बढ़ गया जो उसके नाम से बुक था। उसका दिमाग शराब के नशे में धुंधला था, लेकिन उसकी इंद्रियां अभी भी सतर्क थीं।
जैसे ही उसने दरवाजा खोला, एक अजीब सी सिहरन उसके शरीर से गुजरी। कमरे में हल्का अंधेरा था, सिर्फ नाइट बल्ब की मद्धम रोशनी। लेकिन उसे लगा कि वहां कोई और मौजूद था।
“कौन?” उसने भौहें सिकोड़ते हुए कहा, उसकी आवाज में एक हल्की सी खनक थी।
अचानक, उसे अपनी छाती पर नरम, गर्म हाथों का एहसास हुआ। वह चौंक पड़ा। ये किसी लड़की के हाथ थे—मुलायम, कांपते हुए, लेकिन उनमें एक अजीब सा आकर्षण था।
“प्लीज… मेरी मदद करो…” एक टूटी-फूटी, डरी हुई आवाज में उसने कहा।
रेयांश का दिल तेजी से धड़कने लगा। उसने वे हाथ हटाने की कोशिश की, लेकिन तभी लड़की और करीब खिसक आई और उसकी चौड़ी छाती से लिपट गई। उसकी खुली शर्ट से झांकते मर्दाना जिस्म पर उसका स्पर्श ऐसा था जैसे आग और बर्फ का मिलन।
लड़की के गीले होंठ उसकी गर्दन को छू गए। शराब का नशा पहले से ही चढ़ा था, और अब यह एहसास… उसे मदहोश करने लगा। उसने उसकी कमर थाम ली और कसकर अपनी तरफ खींच लिया।
उसकी सांसें तेज हो गईं। लड़की ने आंखें उठाकर उसकी गहरी आंखों में झांका। उन आंखों में नशा, डर, और एक अजीब सा आकर्षण था।
“तुम आग से खेल रही हो,” उसने भारी आवाज में कहा। “अभी भी वक्त है… संभल जाओ।”
लड़की ने धीमे से मुस्कुराते हुए कहा, “मैं पहले ही जल रही हूं… अब झुलस भी जाऊं, तो क्या फर्क पड़ता है?”
उसकी बातों ने रेयांश के कंट्रोल को तोड़ दिया। उसने अचानक उसे दीवार से दबाया और अपने होंठों को उसके होंठों पर जकड़ लिया। चुंबन इतना गहरा था कि दोनों की सांसें थम गईं।
उसने धीरे से लड़की के होठों को अपने होठों से छुआ। पहले हल्का सा स्पर्श, जैसे वह उसकी सहमति की तलाश कर रहा हो। लड़की की सांसें तेज हो गईं, लेकिन उसने विरोध नहीं किया।
रेयांश का मन उसके होठों की मिठास में खो गया। वह कभी उसके ऊपरी होठ को चूमता, तो कभी निचले होठ को हल्के से चूसता। हर स्पर्श में एक जुनून था, जैसे वह उसकी आत्मा तक पहुंचना चाहता हो। लड़की की आंखें बंद थीं, और उसकी सांसों में एक हल्की सी कांप थी, जो रेयांश के लिए और आकर्षण का कारण बन रही थी।
जैसे-जैसे समय बीतता गया, रेयांश का दिल उसके होठों के रस से भर गया। लेकिन उसकी जिज्ञासा बढ़ती जा रही थी। वह चाहता था कि यह पल और गहरा हो। उसने अपनी जीभ को आगे बढ़ाया, लड़की के मुंह को एक्सप्लोर करने की कोशिश की।
लेकिन लड़की ने अपने होठों को कसकर बंद कर लिया, जैसे वह अभी भी अपने भीतर की दीवारों को बचाने की कोशिश कर रही हो। रेयांश को यह देखकर एक अजीब सा ठहराव महसूस हुआ।
वह जानता था कि उसे मजबूरी नहीं करनी चाहिए, लेकिन उसका शरीर उसकी बात नहीं मान रहा था। उसे उसका मुंह एक्सप्लोर करना ही था।
अचानक, उसने लड़की की कमर पर हल्की सी चिमटी काट दी—न ज्यादा जोर से, लेकिन इतना कि उसे एक झटका लगे। लड़की की चीख निकलने को हुई, लेकिन रेयांश के होठों की मौजूदगी ने उसकी आवाज को दबा दिया।
यह चीख उसके मुंह में ही गूंज गई, और रेयांश ने इस क्षण का फायदा उठाया। उसने अपनी जीभ को धीरे से उसके मुंह में डाला।
लड़की का विरोध कमजोर पड़ गया, और रेयांश ने हर कोने को एक्सप्लोर करना शुरू किया—उसके दांतों के बीच, उसकी जीभ के साथ, और उसकी सांसों की गर्माहट में।
रेयांश को कोई गंदापन महसूस नहीं हुआ। इसके बजाय, उसे एक अजीब सा सुकून मिला, जैसे वह किसी गहरे सागर में डूब रहा हो। यह सुकून उसे और खींचता गया।
उसने अपनी जीभ को लड़की की जीभ के साथ खेलने दिया—धीरे-धीरे, जैसे एक नृत्य हो। लड़की का शरीर अब कांपना बंद हो गया था; उसने भी अपने होठों को थोड़ा खोल दिया, जैसे वह इस पल को स्वीकार कर रही हो। उनकी सांसें एक-दूसरे में मिल रही थीं, और कमरे में सिर्फ उनकी धड़कनों की आवाज गूंज रही थी।
रेयांश का हाथ अब लड़की की कमर पर था, उसे हल्के से सहलाते हुए। वह जानता था कि यह पल सिर्फ शारीरिक नहीं था; इसमें कुछ गहरा, कुछ अनकहा था। लड़की की आंखें अब खुल गईं, और उसने रेयांश की आंखों में देखा। उन आंखों में डर अब कम था; इसके बजाय, एक विश्वास की चमक थी।
तभी वो लड़की कुछ बोलती है, जिसे सुन कर रेयांश हक्का बक्का रह जाता है।
क्या कहा होगा उस लड़की ने?
जानने के लिए पढ़ते रहिए मेरी ये कहानी…


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